We use cookies to give you the best experience possible. By continuing we’ll assume you’re on board with our cookie policy

  • Home
  • Women Development Policy 2011 Essay
  • Article on mahatma gandhi in hindi language essay
  • Article on mahatma gandhi in hindi language essay

    Long and Small Dissertation relating to Mahatma Gandhi during English

    Mahatma Gandhi within Hindi

    आप उन्हें बापू कहो या महात्मा दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती हैं। अहिंसा और सत्याग्रह के संघर्ष से उन्होंने भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाई। उनका mla trend headings for the purpose of essays काम पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया। वो हमेशा कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो, और उनका ये भी मानना था की सच्चाई कभी नहीं हारती। इस महान इन्सान को भारत ने राष्ट्रपिता घोषित कर दिया। उनका पूरा नाम था ‘मोहनदास करमचंद गांधी‘ – Mahatma Gandhi.

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनी – Mahatma Gandhi Biography

    पूरा नाम (Name)मोहनदास करमचंद गांधी (Mahatma Gandhi)
    जन्म दिनांक (Birthday)2 अक्तुंबर 1869 (Gandhi Jayanti)
    जन्मस्थान (Birthplace)पोरबंदर (गुजरात)
    पिता का नाम (Father Name)करमचंद
    माताका नाम introduction to help adhd essay Name)पुतली बाई
    शिक्षा (Education)1887 में मॅट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण। 1891 में इग्लंड में बॅरिस्टर बनकर
    वो भारत essay concerning compound tools history Name)
    कस्तूरबा – Kasturba Gandhi
    बच्चों के नाम (Childrens Name)हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास
    उपलब्धियां (Award)भारत के राष्ट्रपिता, भारत को आजाद दिलवाने में अहम योगदान,
    सत्य और अहिंसा के प्रेरणा स्त्रोत,
    भारत के स्वतंत्रा संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान भारत छोड़ो आंदोलन,
    स्वदेशी आंदोलन, असहयोग steve sheinkin essay स्वदेशी आंदोलन आदि।
    महत्वपूर्ण कार्य (Work)सत्या और अहिंसा का महत्व बताकर इसको लोगों तक पहुंचाया,
    छुआ-छूत जैसी बुराइयों को दूर किया

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवनी – Mahatma Gandhi inside Hindi

    आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वो इसलिए क्योंकि हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi ने अपने अथक प्रयासों के बल पर अंग्रेजो से भारत को आजाद कराया यही नहीं इस महापुरुष ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रहित में लगा दिया। महात्मा गांधी की कुर्बानी की मिसाल आज भी दी जाती है।

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi के पास सत्य और अहिंसा दो हथियार थे जिन्होनें इसे भयावह और बेहद कठिन परिस्थितयों में अपनाया शांति के मार्ग पर चलकर इन्होनें न सिर्फ बड़े से बड़े आंदोलनों में आसानी से जीत हासिल की बल्कि बाकी लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत भी बने।

    महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और musician information essays जी के नामों से भी पुकारा जाता है। वे सादा जीवन, उच्च विचार की सोच वाली शख्सियत थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सदाचार में गुजारा और अपनी पूरी जिंदगी राष्ट्रहित में कुर्बान कर दी। उन्होनें अपने व्यक्तित्व का प्रभाव न सिर्फ भारत में ही बल्कि पूरी दुनिया में डाला।

    महात्मा गांधी महानायक थे जिनके कार्यों की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी कम है। Mahatma Gandhi- महात्मा गांधी कोई भी फॉर्मुला पहले खुद पर अपनाते थे और फिर अपनी गलतियों से सीख लेने की कोशिश करते थे।

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमेशा कहते थे,

    “बुरा मत देखो, बुरा मत pepsin enzyme purpose essay और बुरा मत कहो”

    यानि की वे आदर्शों पर चलने वाले व्यक्ति थे और उनके जीवन के इन्हीं आदर्शों ने उन्हें राष्ट्रपित की संज्ञा दिलवाई।

    महात्मा गांधी जी का जन्म, बचपन, परिवार एवं प्रारंभिक जीवन – Mahatma Gandhi Childhood

    देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का जन्म Two अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता करमचन्द गांधी ब्रिटिश हुकूमत के समय राजकोट के ‘दीवान’ थे। उनकी माता का नाम पुतलीबाई था जो कि धार्मिक विचारों वाली एक कर्तव्यपरायण महिला थी, उनके महान विचारों का गांधी जी पर गहरा प्रभाव पड़ा था।

    महात्मा गांधी जी का विवाह एवं बच्चे – Mahatma Gandhi Partnership Not to mention Family

    महात्मा गांधी जी जब 13 साल के थे, तब बाल विवाह की कुप्रथा के तहत उनका विवाह एक व्यापारी की पुत्री कस्तूरबा मनकजी के साथ कर दिया गया था। कस्तूरबा जी भी एक बेहद शांत और सौम्य स्वभाव की महिला थी। शादी के बाद उन दोनो को चार पुत्र हुए थे, जिनका नाम हरिलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी एवं मणिलाल गांधी था।

    महात्मा गाधी जी की शिक्षा – Mahatma Gandhi Education

    महात्मा गांधी जी शुरु से ही एक अनुशासित छात्र थे, जिनकी शुरुआती शिक्षा गुजरात के राजकोट में ही हुई थी। इसके बाद उन्होंने 1887 में बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। फिर अपने परिवार वालों के कहने पर वे अपने बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड चले गए।

    इसके करीब चार साल बाद 1891 में वे अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने स्वदेश भारत वापस लौट आए। इसी दौरान उनकी माता का देहांत हो गया था, हालांकि उन्होंने इस दुख की घड़ी में भी हिम्मत नहीं हारी और वकालत का काम शुरु किया। वकालत के क्षेत्र में उन्हें कुछ ज्यादा कामयाबी तो नहीं मिली लेकिन जब वे एक केस के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए तो उन्हें रंगभेद का सामना करना पड़ा।

    इस दौरान उनके साथ कई ऐसी घटनाएं घटीं जिसके बाद गांधी जी ने रंगभेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और इससे लड़ने के लिए 1894 में नेटल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की। इस तरह गांधी जी ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर रंगभेदभाव के मुद्दे को उठाया।

    जब इंग्लेंड से वापस लौटे महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi Came because of England

    साल 1891 में गांधी जी बरिस्ट्रर होकर भारत वापस लौटे इसी समय उन्होनें अपनी मां को भी खो दिया था लेकिन इस कठिन समय का भी गांधी जी ने हिम्मत से सामना किया और गांधी जी ने इसके बाद वकालत का काम शुरु किया लेकिन उन्हें इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली।

    गांधी जी की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा – Mahatma Gandhi Have a look at to To the Africa

    Mahatma Gandhi – महात्मा गांधी जी को वकालत के दौरान दादा अब्दुल्ला एण्ड अब्दुल्ला नामक मुस्लिम व्यापारिक संस्था के मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। इस यात्रा में गांधी जी का भेदभाव और रंगभेद की भावना से सामना हुआ। essay bali culture बता दें कि गांधी जी दक्षिण अफ्रीका पहुंचने वाले पहले भारतीय महामानव थे जिन्हें अपमानजनक तरीके से ट्रेन से बाहर उतार दिया गया। इसके साथ ही वहां की ब्रिटिश उनके साथ बहुत भेदभाव करती थी यहां उनके साथ अश्वेत नीति के तहत बेहद बुरा बर्ताव भी किया गया था।

    जिसके बाद गांधी जी के सब्र की सीमा टूट गई और उन्होनें इस रंगभेद के खिलाफ संघर्ष का फैसला लिया।

    जब गांधी जी ने रंगभेद के खिलाफ लिया संघर्ष का संकल्प –

    रंगभेद के अत्याचारों के खिलाफ गांधी जी ने यहां रह ruth bartender essay प्रवासी भारतीयों के साथ मिलकर 1894 में नटाल भारतीय कांग्रेस का गठन किया और इंडियन ओपिनियन अखबार निकालना शुरु किया।

    इसके article upon mahatma gandhi during hindi terms essay 1906 में दक्षिण अफ्रीकी भारतीयों के लिए अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की इस आंदोलन को सत्याग्रह का नाम दिया गया।

    गांधी जी की दक्षिणा अफ्रीका से वापस भारत लौटने पर स्वागत – Mahatma Gandhi Come back towards The indian subcontinent right from Southern states Africa

    1915 में दक्षिण अफ्रीका में तमाम संघर्षों के बाद वे वापस भारत लौटे इस दौरान भारत अंग्रेजो की गुलामी का दंश सह रहा था। अंग्रेजों के अत्याचार से यहां की जनता गरीबी और भुखमरी से तड़प रही थी। यहां हो रहे अत्याचारों को देख गांधी – Mahatma Gandhi जी ने अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जंग लड़ने का फैसला लिया और एक बार फिर कर्तव्यनिष्ठा के साथ वे स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।

    स्वतंत्रता सेनानी के रुप में महात्मा गांधी जी – Mahatma Gandhi simply because the Flexibility Fighter

    महात्मा गांधी जी ने जब अपनी दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से लौटने के बाद क्रूर ब्रिटिश शासकों द्धारा भारतवासियों के साथ हो रहे अमानवीय अत्याचारों को देखा, तब उन्होंने देश से अंग्रेजों को बाहर खदेड़ने का संकल्प लिया और गुलाम भारत को अंग्रेजों के चंगुल से स्वतंत्र करवाने के उद्देश्य से खुद को पूरी तरह स्वतंत्रता संग्राम में झोंक दिया।

    उन्होंने देश की musician profile essays के लिए तमाम संघर्ष और लड़ाईयां लड़ी एवं सत्य और अहिंसा को अपना सशक्त हथियार बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ कई बड़े आंदोलन लड़े और अंतत: अंग्रेजों form to receptacle work registry भारत छोड़ने के लिए विवश कर दिया। वे न सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य सूत्रधार थे, बल्कि उन्हें आजादी के महानायक के तौर पर भी जाना जाता है।

    हमारा पूरा भारत देश आज भी उनके द्धारा आजादी की लड़ाई में दिए गए  त्याग, बलिदान की गाथा गाता है एवं उनके प्रति सम्मान प्रकट करता है।

    गांधी जी के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन – Mahatma Gandhi Aandolan

    • महात्मा गांधी का चंपारण और खेड़ा आंदोलन – Mahatma Gandhi Champaran in addition to Kheda Andolan

    चम्पारण और खेडा में जब अंग्रेज भारत पर शासन कर रहे थे। तब जमीदार किसानों से ज्यादा कर लेकर उनका शोषण कर रहे थे। ऐसे में यहां भूखमरी और गरीबी के हालात पैदा हो गए थे। जिसके बाद गांधी जी ने चंपारण के रहने वाले किसानों के हक के लिए आंदोलन किया और इस आंदोलन में किसानों को Twenty-five फीसदी से धनराशि वापस दिलाने में कामयाब रही।

    इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने अहिंसात्मक सत्याग्रह को अपना हथियार बनाया और वे जीत गए। इससे लोगों के बीच उनकी एक अलग छवि बन गई।

    इसके बाद खेड़ा के किसानों पर अकाली का पहाड़ टूट पड़ा जिसके चलते किसान अपनों करों का भुगतान करने में असमर्थ थे। इस मामले को गांधी जी ने अंग्रेज सरकार के सामने रखा और गरीब किसानों का लगान माफ करने का प्रस्ताव रखा। जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने प्रखर और तेजस्वी गांधी जी का ये प्रस्ताव मान लिया और गरीब किसानों की लगान को माफ कर दिया।

    • महात्मा गांधी का खिलाफत आंदोलन (1919-1924) – Mahatma Gandhi Khilafat Andolan

    गरीब, मजदूरों के बाद गांधी जी ने मुसलमानों द्दारा चलाए गए खिलाफत आंदोलन को भी समर्थन दिया था। ये आंदोलन तुर्की के खलीफा पद की दोबारा स्थापना करने के लिए चलाया गया था। इस आंदोलन के बाद गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता का भरोसा भी जीत लिया था। वहीं ये आगे चलकर गांधी – Mahatma Gandhi जी के असहयोग आंदोलन की नींव बना।

    • महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन (1919-1920) – Mahatma Gandhi Asahyog Andolan

    रोलेक्ट एक्ट के विरोध करने के लिए अमृतसर के जलियां वाला बाग में सभा के दौरान ब्रिटिश ऑफिस ने बिना वजह निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवा दी जिसमें वहां मौजूद 1000 लोग मारे गए थे जबकि 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस घटना से महात्मा गांधी को काफी आघात पहुंचा था जिसके बाद महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलकर आंदोलन करने का फैसला लिया था। इसके तहत गांधी जी ने ब्रिटिश भारत में राजनैतिक, समाजिक संस्थाओं का बहिष्कार करने की मांग की।

    इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने प्रस्ताव की रुप रेखा तैयार की वो इस प्रकार है –

    1. सरकारी कॉलेजों का बहिष्कार
    2. सरकारी अदालतों का बहिष्कार
    3. विदेशी मॉल का बहिष्कार
    4. 1919 अधिनियम के तहत होने वाले चुनाव का बहिष्कार
    • महात्मा गांधी का चौरी-चौरा काण्ड (1922) – Mahatma Gandhi Chauri Chaura Andolan

    5 फरवरी को चौरा-चौरी गांव में कांग्रेस ने जुलूस निकाला था जिसमें हिंसा भड़क गई थी दरअसल इस जुलूस को पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी लेकिन भीड़ बेकाबू होती जा रही थी। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक थानेदार और 7 सिपाहियों को थाने में बंद कर आग लगा ली। इस आग में झुलसकर सभी लोगों की मौत हो गई थी इस घटना से महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi का ह्रद्य कांप उठा था। इसके बाद यंग इंडिया अखबार में उन्होनें लिखा था कि,

    “आंदोलन को हिंसक होने से article in mahatma gandhi for hindi terms essay के लिए मै हर एक अपमान, यातनापूर्ण बहिष्कार, यहां तक की मौत भी सहने को तैयार हूं”

    • महात्मा गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन/डंडी यात्रा/नमक आंदोलन (1930) – Mahatma Gandhi Savinay Avagya Andolan/ Dandi Drive / Namak Andolan

    महात्मा गांधी ने ये आंदोलन ब्रिटिश सरकार के खिलाफ चलाया था इसके तहत ब्रिटिश what is the actual ph associated with blood stream essay ने जो भी नियम लागू किए थे उन्हें नहीं मानना का फैसला लिया research paperwork for human cloning honest issues था अथवा इन नियमों की खिलाफत करने का भी निर्णय लिया था। आपको perspective for healthiness essay दें कि ब्रिटिश सरकार ने नियम बनाया था की कोई अन्य व्यक्ति या फिर कंपनी नमक नहीं बनाएगी।

    12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा द्धारा नमक cry liberty gary biko essay checker इस कानून को तोड़ दिया था उन्होनें दांडी नामक स्थान पर पहुंचकर नमक बनाया था और कानून की अवहेलना की थी।

    Mahatma Gandhi – गांधी जी की दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक चली। दांडी यात्रा साबरमति आश्रम से निकाली गई। वहीं इस आंदोलन को बढ़ते देख सरकार ने तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन को समझौते के लिए भेजा था जिसके बाद गांधी जी ने समझौता स्वीकार कर लिया था।

    • महात्मा गांधी का भारत छोड़ो आंदोलन- (1942) – Mahatma Gandhi Bharat Chhodo Andolan

    ब्रिटिश शासन के खिलाफ महात्मा गांधी ने तीसरा सबसे बड़ा आंदोलन छेड़ा था। इस आंदोलन को ‘अंग्रेजों भारत छोड़ों’ का नाम दिया गया था।

    हालांकि इस आंदोलन में गांधी जी को जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन देश के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ के माध्यम से इस आंदोलन को चलाते रहे उस समय देश का बच्चा-बच्चा गुलाम भारत से परेशान हो चुका था और आजाद भारत में जीना चाहता था। हालांकि ये आंदोलन असफल रहा था।

    महात्मा गांधी news content pieces about human being assistance essay आंदोलन के असफल होने की कुथ मुख्य वजह नीचे दी गई हैं –

    ये आंदोलन एक साथ पूरे देश में शुरु नहीं किया गया। अलग-अलग तारीख में ये आंदोलन शुरु किया गया था जिससे इसका प्रभाव कम हो गया हालांकि इस आंदोलन में बड़े स्तर पर किसानों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था।

    भारत छोड़ों आंदोलन में बहुत से भारतीय यह सोच रहे थे कि स्वतंत्रता संग्राम के बाद उन्हें आजादी मिल urdu essays during urdu terms for quaid ice azam daughter जाएगी इसलिए भी ये आंदोलन कमजोर पड़ गया।

    गांधी जी का भारत छोड़ो आंदोलन सफल जरूर नहीं हुआ था लेकिन इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासकों को इस बात का एहसास जरूर दिला दिया था कि अब और भारत उनका शासन अब और नहीं चल पाएगा और उन्हें भारत छोड़ कर जाना ही होगा।

    Mahatma Gandhi- गांधी जी के शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलाए गए आंदोलनो ने गुलाम भारत को आजाद करवाने में अपनी महत्पूर्ण भूमिका निभाई है और हर किसी के जीवन में गहरा प्रभाव छोड़ा है।

    महात्मा rental contract try essay के आंदोलनों की खास बातें – Necessary items in relation to Mahatma Gandhi’s movements

    महात्मा गांधी -Mahatma Gandhi की तरफ से चलाए गए सभी आंदोलनों में कुछ चीजें एक सामान थी जो कि निम्न प्रकार हैं –

    • गांधी जी के सभी आंदोलन शांति से चलाए गए।
    • आंदोलन के दौरान किसी की तरह की हिंसात्मक गतिविधि होने की वजह से ये आंदोलन रद्द कर दिए जाते थे।
    • आंदोलन सत्य और अहिंसा के बल पर चलाए जाते थे।

    समाजसेवक के रुप में महात्मा गांधी जी – Mahatma Gandhi since some Sociable Reformer

    महात्मा गांधी जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता होने के साथ-साथ एक महान समाज सेवक भी थे। जिन्होंने देश में जातिवाद, छूआछूत जैसी तमाम कुरोतियों को दूर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका सभी जाति, धर्म, वर्ग एवं लिंग के लोगों के प्रति एक नजरिया था।

    उन्होंने जातिगत भेदभाव से आजाद भारत का सपना देखा था। गांधी जी ने निम्न, पिछड़ी एवं दलित वर्ग को ईश्वर के नाम पर ”हरि”जन कहा था और समाज में उन्हें बराबरी का हक दिलवाने के लिए अथक प्रयास किए थे।  

    ”राष्ट्रपिता” (फादर ऑफ नेशन) के रुप में महात्मा गांधी जी – Mahatma Gandhi because Papa involving Nation

    सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी को राष्ट्रपिता की उपाधि भी दी गई थी। उनके आदर्शों और महान व्यक्तित्व के चलते नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने सर्वप्रथम Have a look at जून, 1944 को सिंगापुर रेडियो से एक प्रसारण के दौरान गांधी जी को ”देश का पिता” कहकर संबोधित किया था।

    इसके बाद नेता जी ने 6 जुलाई 1944 को रेडियो रंगून से एक संदेश प्रसारित करते हुए गांधी जी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था।  वहीं 33 जनवरी, 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी ने भारतवासियों को रेडियो पर उनकी मौत का दुखद समाचार देते हुए कहा था कि ”भारत के राष्ट्रपिता अब नहीं रहे”।

    महात्मा गांधी जी द्धारा लिखी गईं किताबें – Mahatma Gandhi Books

    महात्मा गांधी जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी, अच्छे राजनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन लेखक from fossil fuels to be able to eco-friendly energy source essay थे। उन्होंने अपने लेखन कौशल से देश के स्वतंत्रता संग्राम और आजादी के संघर्ष का बेहद शानदार वर्णन किया है। उन्होंने अपनी किताबों में स्वास्थ्य, धर्म, समाजिक सुधार, ग्रामीण सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लिखा है।

    आपको बता दें कि महात्मा गांधी जी ने  इंडियन ओपनियन, हरिजन, यंग इंडिया, नवजीवन आदि पत्रिकाओं में एडिटर के रुप में भी कार्य किया है। उनके द्धारा लिखी गईं कुछ प्रमुख किताबों के नाम निम्नलिखित हैं-

    • हिन्दी स्वराज (1909)
    • मेरे सपनों का भारत (India regarding my best Dreams)
    • ग्राम स्वराज (Village Swaraj simply by Mahatma Gandhi)
    • दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह (Satyagraha throughout To the south Africa)
    • एक आत्मकथा या सत्य के साथ मेरे प्रयोग की कहानी (An Autobiography as well as Typically the Adventure associated with My best Studies with Fact (1927) 
    • स्वास्थ्य की कुंजी (Key For you to Health)
    • हे भगवान (My God)
    • मेरा धर्म(My Religion)
    • सच्चाई भगवान है( Facts is without a doubt God)

    इसके अलावा गांधी जी ने free essays on making skills और किताबें लिखी these soldiers essay, जो न सिर्फ समाज की सच्चाई को बयां करती हैं, बल्कि उनकी दूरदर्शिता को भी प्रदर्शित करती हैं।

    महात्मा गांधी जी के स्लोगन – Mahatma Gandhi Slogan

    सादा जीवन, उच्च विचार वाले महान व्यक्तित्व महात्मा गांधी जी के ने अपने कुछ महान विचारों से प्रभावशाली स्लोगन दिए हैं। जिनसे देशवासियों के अंदर न सिर्फ देश-प्रेम की भावना विकिसत होती है, बल्कि उन्हें सच्चाई के मार्ग पर चलने की भी प्रेरणा मिलती है, महात्मा गांधी जी के कुछ लोकप्रिय स्लोगन इस प्रकार हैं-

    • आपका भविष्य इस tiger shark nicknames essay पर निर्भर करता है कि आज आप क्या कर रहे हैं- महात्मा गांधी
    • करो या मरो- महात्मा गांधी
    • शक्ति शारीरिक क्षमता से नहीं आती है, यह एक अदम्य इच्छा शक्ति से आती है- महात्मा गांधी
    • पहले वो आप पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हंसेगें, और फिर वो आपसे लड़ेंगे तब आप निश्चय ही जीत जाएंगे – महात्मा गांधी
    • अपना जीवन कुछ इस तरह जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसे सीखो जैसे कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो- महात्मा गांधी
    • कानों का दुरुपयोग मन को दूषित एवं अशांत करता है- महात्मा गांधी
    • सत्य कभी भी ऐसे कारण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता जो कि उचित हो-महात्मा गांधी
    • भगवान का कोई धर्म नहीं है- महात्मा गांधी
    • ख़ुशी तब ही मिलेगी जब आप, जो भी सोचते हैं, जो भी कहते हैं और जो भी करते हैं, वो सब एक सामंजस्य में हों- महात्मा गांधी

    महात्मा गांधी जी की जयंती – Mahatma Gandhi Jayanti

    2 अक्टूबर को पूरे देश में गांधी जयंती (Gandhi Jayanti) के रुप में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी 1869 में गुजरात के पोरबंदर शहर में जन्में थे। गांधी जी अहिंसा के पुजारी थे, इसलिए Two अक्टूबर के दिन को पूरे विश्व में विश्व अहिंसा दिवस के रुप में भी मनाया जाता है।

    गांधी जयंती के मौके पर स्कूल, कॉलेजों में अन्य शैक्षणिक संस्थानों में तमाम तरह के home daycare small business prepare ontario का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति समेत कई बड़े राजनेता दिल्ली के राजघाट पर बनी गांधी प्रतिमा पर सच्चे मन से श्रद्धांजली अर्पित करते हैं। वहीं गांधी जयंती को राष्ट्रीय अवकाश भी घोषित किया गया है।

    महात्मा गांधी की कुछ खास बातें – Certain unique details associated with Mahatma Gandhi

    • सादा जीवन, उच्च विचार –

    राष्ट्रपति महात्मा गांधी – Mahatma Gandhi सादा जीवन उच्च विचार में भरोसा रखते थे उनके इसी स्वभाव की वजह से उन्हें ‘महात्मा’ कहकर बुलाते थे।

    महात्मा गांधी के जीवन के A couple of हथियार थे सत्य और अहिंसा। इन्हीं के बल पर उन्होनें भारत को गुलामी से आजाद कराया और अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर किया।

    • छूआछूत को दूर करना था गांधी जी का मकसद

    Mahatma Gandhi – महात्मा गांधी का मुख्य उद्देश्य समाज में फैली छुआछूत जैसी कुरोतियों को दूर करना था इसके लिए उन्होनें काफी कोशिश की और पिछड़ी जातियों को उन्होनें ईश्वर के नाम पर हरि ‘जन’ नाम दिया।

    महात्मा गांधी जी की मृत्यु – Passing away about Mahatma Gandhi

    नाथूराम गोडसे और उनके सहयोगी गोपालदास ने 25 जनवरी 1948 को बिरला हाउस में गांधी जी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

    एक नजर में महात्मा गांधीजी की जीवन कार्य – Mahatma Gandhi Quick Biography

    • 1893 में दादा अब्दुला के कंपनी का मुकदमा चलाने के लिये दक्षिण आफ्रिका को जाना पड़ा। महात्मा गांधी जब दक्षिण आफ्रिका में थे तब उन्हें भी अन्याय-अत्याचारों का सामना करना पड़ा। उनका प्रतिकार करने के लिये भारतीय लोगों को संघटित करके उन्होंने 1894 advantages disadvantages handphones documents for loveनेशनल इंडियन कॉग्रेस” की स्थापना की।
    • 1906 में वहा के शासन के आदेश के अनुसार पहचान पत्र साथ में रखना जरुरी था। इसके अलावा रंग भेद नीती के खिलाफ उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया।
    • 1915 में महात्मा गांधीजी भारत लौट आये और उन्होंने सबसे पहले साबरमती में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की।
    • 1919 में उन्होंने ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन शुरु किया।
    • 1920 में असहयोग आंदोलन शुरु किया।
    • 1920 में लोकमान्य तिलक के मौत के बाद राष्ट्रिय सभा का नेवृत्त्व महात्मा गांधी के पास आया।
    • 1920 में नागपूर के अधिवेशन में राष्ट्रिय सभा ने असहकार के देशव्यापी आंदोलन अनुमोदन देनेवाला संकल्प पारित किया। असहकार आंदोलन की सभी सूत्रे महात्मा गांधी पास दिये गये।
    • 1924 case analysis type designer बेळगाव यहा राष्ट्रिय सभा के अधिवेशन का अध्यक्षपद।
    • 1930 में सविनय अवज्ञा आदोलन शुरु हुआ। नमक के उपर कर और नमक बनाने की article in mahatma gandhi in hindi language essay एकाधिकार रद्द की जाये। ऐसी व्हाइसरॉय से मांग की, व्हाइसरॉय ने उस मांग को नहीं माना तब गांधीजी ने नमक का कानून तोड़कर सत्याग्रह करने की ठान ली।
    • 1931 में राष्ट्रिय सभा के प्रतिनिधि बनकर गांधीजी दूसरी गोलमेज परिषद को उपस्थित थे।
    • 1932 में उन्होंने अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना की।
    • 1933 में उन्होंने ‘हरिजन’ नाम का अखबार शुरु किया।
    • 1934 में गांधीजीने वर्धा के पास ‘सेवाग्राम’ इस आश्रम की स्थापना की। हरिजन सेवा, ग्रामोद्योग, ग्रामसुधार, आदी।
    • 1942 में चले जाव आंदोलन शुरु हुआ। ‘करेगे या मरेगे’ ये नया मंत्र गांधीजी ने लोगों को दिया।
    • व्दितीय विश्वयुध्द में महात्मा गांधीजी – Mahatma Gandhi ने अपने देशवासियों से ब्रिटेन के लिये न लड़ने का आग्रह किया था। expository dissertation 6th class types of alliteration लिये उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। युध्द के उपरान्त उन्होंने पुन: स्वतंत्रता आदोलन की बागडोर संभाल ली। अंततः 15 अगस्त 1947 में हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त हो गई। गांधीजीने सदैव विभिन्न धर्मो के प्रति सहिष्णुता का संदेश दिया।
    • 1948 में नाथूराम being anxious essay ने अपनी गोली से उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी। इस दुर्घटना से सारा विश्व शोकमग्न हो गया था।

    महात्मा गांधी महान पुरुष थे उन्होनें अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण काम किए वहीं गांधी जी के आंदोलनों की सबसे खास बात यह रही कि उन्हें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर सभी संघर्षों का डटकर सामना किया।

    उन्होनें अपने जीवन में हिंदू-मुस्लिम को एक करने के भी कई कोशिश की। इसके साथ ही गांधी जी का व्यक्तित्व ऐसा था constant tempo propeller essay हर कोई उनसे मिलने के लिए आतुर रहता था और उनसे मिलकर प्रभावित हो जाता था।

    मोहनदास करमचंद गांधी – Mahatma Gandhiभारत के स्वतंत्रता आंदोलन के निदेशक थे। उन्ही की प्रेरणा से 1947 में भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो सकी। अपनी अदभुत आध्यात्मिक शक्ति से मानव जीवन के homeworks windows and additionally doors मूल्यों को उदभाषित करने वाले। विश्व इतिहास के महान तथा अमर नायक महात्मा गांधी आजीवन सत्य, अहिंसा और प्रेम का पथ प्रदर्शित करते रहे।

    महात्मा गांधी जी पर बनी फिल्में – Mahatma Gandhi Movie

    महात्मा गांधी जी आदर्शों और सिद्धान्तों पर चलने वाले महानायक थे, उनके प्रेरणादायक जीवन पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अन्य देशप्रेमियों और स्वतंत्रता सेनानियों पर भी बनी फिल्मों में गांधी जी का अहम किरदार दिखाया गया है। यहां हम आपको गांधी जी बनी कुछ प्रमुख फिल्मों की सूची उपलब्ध करवा रहे हैं, जो कि इस प्रकार है-

    1. फिल्म- ‘गांधी’ (1982)

    डायरेक्शन-   रिचर्ड define analytical researching essay जी का किरदार निभाया- हॉलीवुड कलाकार बने किंस्ले

    2- फिल्म- ”गांधी माइ फादर”(2007)

    डायरेक्टर- फिरोज अब्बास मस्तान

    गांधी जी का किरदार निभाया- दर्शन जरीवाला

    3- फिल्म- ”हे राम” (2000)

    डायरेक्टर-कमल हसन

    गांधी जी का किरदार निभाया- नसीरुद्दीन शाह

    4- फिल्म- ”लगे रहो मुन्नाभाई”

    डायरेक्टर- राजकुमार हिरानी (2006)

    गांधी जी का किरदार निभाया- दिलीप प्रभावलकर

    5- फिल्म- ”द मेकिंग ऑफ गांधी”(1996)

    डायरेक्टर- श्याम बेनेगल

    गांधी जी का किरदार निभाया-रजित कपूर

    6- फिल्म- ”मैंने गांधी को नहीं मारा”(2005)

    डायरेक्शन- जहनु बरुआ

    इसके अलावा भी कई अन्य फिल्में भी गांधी जी के जीवन पर प्रदर्शित की गई हैं।

    महात्मा गांधी जी के भजन – Mahatma Gandhi Bhajan

    महात्मा गांधी जी के प्रिय भजन जिसे वह अक्सर गुनगुनाते थे-

    भजन नंबर 1-

    वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीर पराई जाणे रे ।।

    पर दुःखे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे ।।
    सकल लोक माँ सहुने वन्दे, निन्दा न करे केनी रे ।।
    वाच काछ मन निश्चल राखे, धन-धन जननी तेरी रे ।।

    वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीर पराई जाणे रे ।।

    समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, पर स्त्री जेने मात रे ।।
    जिहृवा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाले हाथ रे ।।
    मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ वैराग्य जेना तन मा रे ।।
    राम नामशुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मा रे ।।
    वण लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्या रे ।।
    भणे नर सैयों तेनु दरसन करता, कुळ एको तेर तार्या रे ।।

    आपको बता दें कि महात्मा गांधी जी का यह भजन साल 2018 में वैश्विव हो गया था, इस भजन को 124 देशों के कलाकरों ने एक साथ गाकर बापू जी को श्रद्धांजली अर्पित की थी।

    भजन नंबर 2-

    रघुपति राघव राजाराम,

    पतित पावन सीताराम

    सीताराम सीताराम,

    भज प्यारे तू सीताराम

    रघुपति राघव राजाराम ।।

    ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,

    सब को सन्मति दे भगवान

    रघुपति राघव राजाराम ।।

    रात का निंदिया दिन तो काम

    कभी भजोगे प्रभु का नाम

    करते रहिए अपने काम

    लेते रहिए हरि का नाम

    रघुपति राघव राजा राम ।।

    इस भजन के अलावा भी गांधी जी ”साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।।।।…….” आदि भजन भी गुनगुनाते थे ।

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन के बारे में कई रोचक composition regarding my own best colleague essay महत्वपूर्ण तथ्य हैं, जो हम आपको यहाँ बतायेंगे …

    Editorial Team

    GyaniPandit.com Ideal Hindi Web site Just for Motivational And Useful Write-up.

    The following Anyone Might Locate Hindi Prices, Suvichar, Resource, Back ground, Helpful Business people Tales, Hindi Spiel, Persona Expansion Report Plus Alot more Valuable Articles and other content With Article 26a lpp essay